Wednesday, 9 January 2013

जिंदगी

                                                                 जिंदगी 

जिंदगी की सफलताओ ने होठो पर हँसी खिला दी थी। परंतु यह हँसी ज्यादा देर न रह पाई  और दुखो की
 बदली ने आँखों में  आंसू  ला दिए। मैंने मन ही मन ईश्वर से प्रार्थना  कि हे  ईश्वर ! तुम तो  कहते थे , कि  अच्छे  कर्म  करो। हमेशा होठो पर मुस्कान रहेगी। फिर मेरी आँखों में आंसू क्यों ?
                                    शांत स्वर में एक अदृश्य  शक्ति की आवाज आई , मैंने सही कहा है। जब जिंदगी
 हँसाए  तब समझना  अच्छे कर्मो का फल है। लेकिन जब जिंदगी रुलाए  तब समझ जाना की अब अच्छे
 कर्म करने का वक़्त आ गया है। अरे दोस्तों यही ज़िंदगी है।



No comments:

Post a Comment